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आंखो को रखे बरकरार (क्या करें और क्या न करें)

क्या करे...... ?कसरतघर पर ऐसी जगह खड़े हो जाएं , जहां से आप दूर तक देख सकें । तर्जनी को सामने की ओर 15 इंच की दूरी पर रखें । पहले उंगली और फिर सबसे दूरस्थ जो वस्तु देख सकते हैं उसे एकटक देखने की कोशिश करें । ऐसा दिन में तीन बार करें ।
  विटामिन सीयह शरीर के रोग प्रतिरोधक तंत्र को मजबूती प्रदान करता है । यह आंखों का बीमारियों और इंफेक्शन से बचाव करता है । इसका सेवन आवश्यक है ।
त्राटकसूखापन दूर करने के लिए त्राटक करें । अंधेरे में दिया जलाकर आंखों के समानांतर डेढ़ फीट की दूरी पर रखी लौ पर आधा घंटा ध्यान केन्द्रित करें । इससे आंखों में पानी आ जाएगा ।

चिलचिलाती गर्मी में आंखों की देखभाल जरूरी है । जानिए आंखों को सेहतमंद रखने के लिए क्या करें ।


क्या न करे.....?

शक्कर की अधिकताअधिक शक्कर की मात्रा से आंखें कमजोर हो सकती हैं । शक्कर वाले पेय से परहेज करें । ।
  सीधा प्रकाशतेज़ प्रकाश जैसे सूर्य या तेज रोशनी वाले बल्ब आदि को सीधे न देखें । इससे आंखों की तंत्रिकाओं और कोशिकाओं दोनों को नुक़सान हो सकता है ।
     लगातार चश्मा पहनापूरे दिन के दौरान कुछ समय के लिए चश्मा एक ओर रख दें । कॉन्टेक्ट लेंस भी…
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नारियल

नारियल नारियल के पानी में गुड़ और धनिया मिलाकर सेवन करने से दाह
मूत्रकृच्छ रोग ठीक होता है।

शहद या गुड़ के साथ खोपरा खिलाने से बच्चों का दुबला-पतला शरीर तगड़ा होता है।

ताजे नारियल के खोपरे का रस निकालकर आँच पर उबालकर, तेल निकालकर
काली मिर्च को मिलाकर शरीर पर लगाने से वाय जक
वायुमुक्त होते है और वात रोग ठीक होता है।

नारियल के छिलकों को जलाकर राख बनाकर शहद में मिलाकर चाटने से
उल्टी आना और हिचकी बंद हो जाता है।

खोपरे को मूली के रस में घिसकर चूहे के काटे स्थान पर लेप करने से लाभ
होता है।

नारियल के पानी में ईमली के बीज, शक्कर और इलायची को मिलाकर
सेवन करने पर रक्तपित्त और मूत्रकृच्छ रोग में लाभ होता हैं।

ताजे नारियल का 10 लीटर पानी निकालकर काढ़ा बनाकर, उसमें जायफल,
सौंठ, पीपर, काली मिर्च, जावित्री थोड़ी-सी बुकनी डालकर काँच के
बर्तन में रख लें। इसमें से आधा-आधा ग्राम दिन में दो बार सुबह-शाम
सेवन करते रहने पर कुछ दिनों में अम्लपित्त, उदरशूल और यकृत वृद्धि
दूर होती है।

नारियल का पानी, ईमली के पानी,ईमली के बीज, शक्कर और इलायची को मिलाकर
सेवन करने पर रक्तपित्त और मूत्र कृच्छ रोग ठीक होते हैं

चेहरे…

फिटकरी

4 ग्राम फिटकरी पीसकर आधा लीटर गाय के दूध में मिलाकर पीने से
आंतरिक चोट में लाभ होता है।

दाढ़ी बनवाने के बाद फिटकरी को पानी में मिलाकर चेहरे पर लगाने से
त्वचा रोग नहीं होता और जलन दूर होती है।

जिस स्थान पर दीमक या चीटियाँ हो वहाँ पर फिटकरी सरसों के तेल में
मिलाकर डालने से चीटियाँ और दीमक उस स्थान को छोड़ देती हैं।

कान में चींटी घुसने पर फिटकरी को पानी में घोलकर टपकाने से लाभ
होता है।

फिटकरी को पानी में घोलकर कुल्ले करते रहने से मुँह के छले दूर हो जाते हैं।

फिटकरी को पानी में घोलकर पिलाने से सर्प का विष उतर जाता है।

फिटकरी को उबालकर पानी से सूजन और खाज वाले स्थानों को धोने से
लाभ होता है।

1 ग्राम फिटकरी 2 ग्राम चीनी में मिलाकर ज्वर आने से पहले 2-2 घंटे के
अंतर से 2 बार रोगी को सेवन कराने से मलेरिया ज्वर ठीक हो जाता है।

सैंधा नमक और फिटकरी को समान मात्रा में मिलाकर, पीसकर पाउडर
बनाकर मंजन करते रहने पर दाँतों और मुँह का लिबलिबापन ठीक हो जाता है।

आधा गिलास पानी में 5 ग्राम फिटकरी को घोलकर पीने से हैजा रोग ठीक
होता है।


बंद होता है। यदि नकसीर में रक्त आना बंद न हो तो चौथाई चम्मच
फिटकरी पानी…

पहली चाय की कहानी...

पहली चाय की कहानी... क कथा के अनुसार क़रीब 2700 ईसापूर्व चीनी शाशक शेन मुंग बाग़ीचे में बैठे गर्म पानी पी रहे थे। तभी एक पेडकी पत्ती उस पानी में आ गिरी जिससे उसका रंग बदलाऔर महक भी उठी। राजा ने चखा तो उन्हें इसका स्वादबड़ा पसंद आया और इस तरह चाय का आविष्कार हुआ।वहीं एक और कथा के अनुसार छठवीं शताब्दी में चीन केहुनान प्रांत में भारतीय बौद्ध भिक्षु बोधिधर्म बिना सोए ध्यानसाधना करते थे। वे जागे रहने के लिए एक ख़ास पौधे कीपत्तियां चबाते थे और बाद में यही पौधा चाय के पौधे केरूप में पहचाना गया। चाय के प्रकार...वाइट टी शुद्ध और सभी चाय मेंसबसे कम प्रोसेस्ड होती है। ग्रीन टीसबसे मशहूर और एशिया में ख़ासीपसंद की जाती है। ओलांग टी चीनीचाय है जो चाइनीज रेस्त्रां में परोसीजाती है। ब्लैक टी को केवल गर्म| पानी में पत्तियां डालकर या दूध औरशक्कर के साथ भी पिया जाता है।| हर्बल टी में किसी भी प्रकार की चाय की पत्तियां नहीं डाली जाती हैं।
भारत में चाय का आठान... 1824 में बर्मा (म्यांमार) और असम की सीमांत पहाड़ियों
पर चाय के पौधे पाए गए। अंग्रेजों ने चाय उत्पादन की
शुरुआत 1836 में भारत और 1867 में श्रीलंका …

नीबू रस के फायदे

पसीने की दर्गन्ध से बचना
पसीने की दुर्गन्ध से बचने के लिए पानी मे नींबू निचोड़ कर बगल में और पसीना आने
वाली जगहों पर लगाएं। 15 मिनट बाद ठंडे पानी से धो लें। रोजाना इसका
इस्तेमाल करने से धीरे धीरे पसीने की दुर्गन्ध खत्म होती जाएगी।
चेहरे को ट्रेनिंग से बचना
चेहरे को ट्रेनिंग से बचने के लिए थोड़ा सा नींबू रस चेहरे पर लगाएं। 10 मिनट के
बाद ठंडे पानी से चेहरे को धो लें। बेहतर परिणाम पाने के लिए दिन में दो बार
दोहराएं।
मुख की दुर्गन्ध से आराम
एक चम्मच शहद,एक चम्मच नींबू रस,एक चम्मच दालचीनी पाउडर को आधे कप
गुनगुने पानी में मिलाकर गरारे करने से मुंह की दुर्गन्ध से आराम मिलता है।

तीखेपन का प्राय मिर्च

• मिर्च की उत्पत्ति
मिर्च का उपयोग पहली बार क़रीब हजार ईसा पूर्व मैक्सिको में
हुआ था। मैक्सिकोवासी इसका उपयोग रोजमर्रा के भोजन में करते।
| थे। मिर्च का परिचय बाकी दुनिया से तब हुआ जब।
| इटैलियन समुद्री नाविक क्रिस्टोफर कोलंबस भारत का
समुद्री मार्ग खोजते हुए अमेरिका पहुंच गए। उनके साथ मिर्च यूरोप
पहुंची। तीखे स्वाद और तासीर के कारण इसे काली मिर्च के पौधे
‘पाइपर निग्रम' के नाम पर 'पैपर' कहा गया। यूरोपीय भोजन में
मिर्च ने अपना रुतबा बढ़ाया और हर व्यंजन मिर्च के बिना अधूरा
माना जाने लगा।
• मिर्च के जुदा रंग
अमेरिका से मिर्च के बीज आयात हुए और नई किस्में उगाने का
सिलसिला चल पड़ा। आज मिर्च ठंडे प्रदेशों को छोड़कर सभी
उष्णकटिबंधीय (ट्रॉपिकल) क्षेत्रों में उगाई जाती है। विश्वभर में
| मिर्च की लगभग 400 अलग-अलग प्रकार की किस्में पाई जाती
हैं। मिर्च न केवल पाक कला बल्कि दवा निर्माण के क्षेत्र में भी
उपयोग की जाती है। राजस्थान में तो केवल मिर्च और मसालों के
साथ ही कई व्यंजन बनाए जाते हैं।
०भारत का मिर्च प्रेम
| मिर्च भारत पहुंची पुर्तगालियों के साथ। मिर्च का जैविक नाम तो
कैप्सिकम एनम…

सेब के लाभ

★ सेब को आँच पर सेंककर , मसलकर पुल्टिश बनाकर रात में नेत्रों पर बांधने से कछ दिनों में आँखों का दर्द , भारीपन , दृष्टि मन्दता में लाभ होता है ।
★ सेब को आँच पर सेंककर सेवन करने से पाचन क्रिया में लाभ . सेब के छोटे - छोटे टुकड़ों को काँच के बर्तन में चाँदनी । प्रात : काल एक माह सेवन करते रहने पर शरीर तन्दरुस्त होता है ।
★ 2 सेब का सेवन करते रहने पर हाई ब्लड प्रेशर ( उच्च रक्तचाप ) रोग ठीक हो जाता है ।
★ सेब का रस मस्सों पर लगाते रहने से मस्से छोटे छोटे होकर गिर जाते हैं । सेब का सेवन करते रहने से यकृत रोगों में लाभ होता है । ज्वर में सेब का सेवन करने से ज्वर उतर जाता है ।
★ मलेरिया ज्वर आने से पहले सेब का सेवन करने से लाभ होता है ।
★ 1 सेब को पीसकर लुगदी बनाकर चेहरे पर लगाकर 10 मिनट लगे रहने के बाद चेहरे को गर्म पानी से धोने से तैलीय त्वचा मुलायम बनती है ।
★ भोजन से पहले छिलके सहित सेब का सेवन करने से मस्तिष्क की कमजोरी दूर होकर जुकाम ठीक हो जाता है ।
★ सेब का मुरब्बा कुछ दिनों तक सेवन करते रहने से हृदय की दुर्बलता में लाभ होता है ।
★ सेब का रस पानी में मिलाकर पीने से प्यास लगना कम हो जाता है …

बेर के लाभ

★बेर  वृक्ष के पत्तों का चूर्ण मल्ले के साथ पीने से अतिसार रोग ठीक हो जाता है ।★ बेर के पत्तों को पीसकर गर्म करके उसकी पुल्टिश बांधने से फोड़े - फुसी में लाभ होता है । ★ बेर वृक्ष के कोमल पत्ते व जीरा मिलाकर पानी में पीसकर उनकी ठंडाई ( भाँग ) बनाकर कपड़े से छानकर पीने से गर्मी के कारण रुका पेशाब खुलकर आता है । ★ बेर के बीज को पानी में घिसकर दिन में 2 बार 1 - 2 बार लगाते रहने से नेत्र स्त्राव दूर हो जाता है । ★ बेर वृक्ष की छाल और पत्तों का काढ़ा बनाकर छाछ में मिलाकर पशुओं को पिलाने से चेचक रोग ठीक हो जाता है । ★ बेर वृक्ष की छाल का टुकड़ा मुँह में रखकर रस चूसते रहने से दबी आवाज खुल जाती है । ★ बेर के बीज का गर्भ और पलाश ( ढाक ) के बीज समान मात्रा में मिलाकर आक के दूध में 6 घंटे तक खरल करके रुई के फाहे की बाती को भिगोकर बिच्छू के काटे स्थान पर लेप करने से बिच्छू के विष का प्रभाव दूर हो जाता है । ★ताजे या सूखे 20 ग्राम चनाबेर 16 गुना पानी में उबालकर , एक चौथाई भाग शेष रहने पर कपड़े से छानकर थोड़ी - सी चीनी मिलाकर सेवन कराने से ज्वर की दाह , तृषा एवं व्याकुलता दूर होती है और पित्तज्वर , विषम …

पसीना आना समान्य बात

पसीनाआना हमारे शरीर की एवं बिल्कुल सामान्य प्रक्रिया है । इससे शरीर का तापमान नियंत्रित होता है । मसलन बरखार में पसीना आता है । जिससे श्रीर का तापमान नियंत्रण में रहता है । शरीर में मौजूद ऊष्मा के विन्यमन के लिए पसीना निकलता है , लेकिन कभी - कभी पसीना अधिक आना मुश्किलें खड़ी कर देता है । कारण यह है कि पसीने को नियंत्रित करने वाली ग्रंथि अति सक्रिय हो जाती है । उपचार के लिए कई बार इटा सा ऑपरेशन करने की भी जरूरत एर जाती है । अधिक पसीने के लिए कोई उपचार पद्धति नहीं है लेकिन एहतियात के तौर पर दो बार नहाए और टैल्कम का इस्तेमाल करें । पसीना अधिक आने की वजह से बगल में तथा जोड़ों के भीतर फंगल इंफेक्शन भी हो सकता है । रह मुख्यतः बारिश और गर्मी के मौसम में होता है जिसे टीनिया कुरसिस कहते हैं । लड़कों के मुकाबले लड़कियों को अधिक समस्याओं का साना करना पड़ता है , क्योंकि अधिक पसीना आने के कारण बालों में नमी । बनी रह स्कती है जिससे कई तरह | र्क त्वचा संबंधित समस्याएं सिर उठा सकती हैं । इससे बचने के लिए रोजना | सिर धोना जरूरी है । बालों को लगातार एंटी टैंड्रफ शेपू से साफ़ करें , नहीं तो इसमें बैक्टी…

आदत न बन जाए

किसी विशिष्ट पदार्थ जैसे कुछ मीठा, नमकीन या जंक फुड।लोग चाहकर भी इससे पीछा नहीं छुड़ा पाते हैं। इसको अंग्रेजी में क्रेविंग कहते हैं - अर्थात किसी चीज को खाने की तीव्र इच्छा, लालसा। कुछ लोगों में यह क्रेविंग इस क़दर हावी हो जाती है कि वे अपनी आर्थिकता के लिए कुछ भी कर जाते हैं। हालांकि कई मामलों में यह शरीर में किसी चीज़ की कमी का सूचक हो सकता है। कुछ लोगों को कैल्शियम की कमी के कारण संक्रमण या स्लेट पेंसिल खाते हैं। लेकिन लंबे समय के लिए यह स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालता है।