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नीबू रस के फायदे






पसीने की दर्गन्ध से बचना
पसीने की दुर्गन्ध से बचने के लिए पानी नींबू निचोड़ कर बगल में और पसीना आने
वाली जगहों पर लगाएं। 15 मिनट बाद ठंडे पानी से धो लें। रोजाना इसका
इस्तेमाल करने से धीरे धीरे पसीने की दुर्गन्ध खत्म होती जाएगी।
चेहरे को ट्रेनिंग से बचना
चेहरे को ट्रेनिंग से बचने के लिए थोड़ा सा नींबू रस चेहरे पर लगाएं। 10 मिनट के
बाद इंडे पानी से चेहरे को धो लें। बेहतर परिणामपाने के लिए दिन में दो बार
दोहराएं।
मुख की दुर्गन्ध से आराम
एक चम्मच शहद एक चम्मच नींबू रस एक चम्मच दालचीनी पाउडर को आधे कप
गुनगुने पानी में मिलाकर गरारे करने से मुंह की दुर्गन्ध से आराम मिलता है।
भोजन पाचन को दुरुस्त राना
भोजन के बाद नींबू पानी पीने से पाचन को दुरुस्त मिलता है।

तीखेपन का प्राय मिर्च





• मिर्च की उत्पत्ति
मिर्च का उपयोग पहली बार क़रीब हजार ईसा पूर्व मैक्सिको में
हुआ था। मैक्सिकोवासी इसका उपयोग रोजमर्रा के भोजन में करते।
| थे। मिर्च का परिचय बाकी दुनिया से तब हुआ जब।
| इटैलियन समुद्री नाविक क्रिस्टोफर कोलंबस भारत का
समुद्री मार्ग खोजते हुए अमेरिका पहुंच गए। उनके साथ मिर्च यूरोप
पहुंची। तीखे स्वाद और तासीर के कारण इसे काली मिर्च के पौधे
‘पाइपर निग्रम' के नाम पर 'पैपर' कहा गया। यूरोपीय भोजन में
मिर्च ने अपना रुतबा बढ़ाया और हर व्यंजन मिर्च के बिना अधूरा
माना जाने लगा।
• मिर्च के जुदा रंग
अमेरिका से मिर्च के बीज आयात हुए और नई किस्में उगाने का
सिलसिला चल पड़ा। आज मिर्च ठंडे प्रदेशों को छोड़कर सभी
उष्णकटिबंधीय (ट्रॉपिकल) क्षेत्रों में उगाई जाती है। विश्वभर में
| मिर्च की लगभग 400 अलग-अलग प्रकार की किस्में पाई जाती
हैं। मिर्च न केवल पाक कला बल्कि दवा निर्माण के क्षेत्र में भी
उपयोग की जाती है। राजस्थान में तो केवल मिर्च और मसालों के
साथ ही कई व्यंजन बनाए जाते हैं।
०भारत का मिर्च प्रेम
| मिर्च भारत पहुंची पुर्तगालियों के साथ। मिर्च का जैविक नाम तो
कैप्सिकम एनम है लेकिन इसने स्थानीय भाषाओं में अलग-अलग
नाम पाए हैं। हिंदी में लाल मिर्च, बंगाली व उड़िया में लंका या
लंकामोरिच, गुजराती में मार्च व मलयालम में मुलाकू। नाम कई
हों लेकिन मिर्च की तासीर हर जगह एक सी है। विदेशियों के साथ
आई मिर्च इस क़दर देसी बन गई कि दुनिया की सबसे तीखी मिर्च
‘भूत झोलकिया' उत्तर भारतीय राज्य असम में उगाई जाती है। इसे
नागा झोलकिया, नागा मोरिच और घोस्ट चिली भी कहा जाता है।

सेब के लाभ

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रात में 1 सेब खाने से मलावरोध और जरावस्था का मलावरोध दूर होता है । और उदर शुद्धि होती है ।
 सेब को आँच पर सेंककर , मसलकर पुल्टिश बनाकर रात में नेत्रों पर बांधने से कछ दिनों में आँखों का दर्द , भारीपन , दृष्टि मन्दता में लाभ होता है ।


जलकर 10 मिनट तक बि रस और 1 ग्राम में थकान , घबराहट , दर्द और ने पर दांतों का रक्त * पात में रखकर सेब वृक्ष की 2 ग्राम छाल और 200 ग्राम पत्तों को उबालकर ढककर रखें और उतारकर छान लें । इसमें 1 टुकड़ा नींबू रस । चीनी मिलाकर सेवन करने से ज्वर की प्यास , थकान यकृत विकार के ज्वर में लाभ होता है ।
थोडेसे सोडे में सेब का रस मिलाकर दाँतों पर मलते रहने पर दांत निकलना बंद होता है और जमी पपड़ी उखड़ जाती है ।
 सेब को आँच पर सेंककर सेवन करने से पाचन क्रिया में लाभ . सेब के छोटे - छोटे टुकड़ों को काँच के बर्तन में चाँदनी । प्रात : काल एक माह सेवन करते रहने पर शरीर तन्दरुस्त होता है ।
पके सेब का सेवन करने से रात में पेशाब अधिक मात्रा में आना बंद हो जाना । पके सेब के 1 गिलास रस में मिश्री मिलाकर प्रात : काल सेवन करते रहने । पुरानी खाँसी ठीक हो जाती है ।
 2 सेब का सेवन करते रहने पर हाई ब्लड प्रेशर ( उच्च रक्तचाप ) रोग ठीक हो जाता है । सेब के रस का सेवन करते रहने पर गुर्दे और मूत्राशय में पथरियाँ बनना बंद हो जाता है ।
 सेब का रस मस्सों पर लगाते रहने से मस्से छोटे छोटे होकर गिर जाते हैं । सेब का सेवन करते रहने से यकृत रोगों में लाभ होता है । ज्वर में सेब का सेवन करने से ज्वर उतर जाता है ।
 मलेरिया ज्वर आने से पहले सेब का सेवन करने से लाभ होता है ।
 1 सेब को पीसकर लुगदी बनाकर चेहरे पर लगाकर 10 मिनट लगे रहने के बाद चेहरे को गर्म पानी से धोने से तैलीय त्वचा मुलायम बनती है ।
 भोजन से पहले छिलके सहित सेब का सेवन करने से मस्तिष्क की कमजोरी दूर होकर जुकाम ठीक हो जाता है ।
 सेब का मुरब्बा कुछ दिनों तक सेवन करते रहने से हृदय की दुर्बलता में लाभ होता है ।
 सेब का रस पानी में मिलाकर पीने से प्यास लगना कम हो जाता है ।
 जिन शिशुओं को दूध न पचता हो , दुग्धपान करते ही वमन और दस्त आते हों तब दूध को न पिलाकर थोड़े - थोड़े समय पर सेब का रस सेवन कराने से । वमन और दस्त बंद हो जाते हैं ।
 सेब का रस सेवन करते रहने से पुराने दस्तों में लाभ होता है ।




सेब का पूरा या छिलकों सहित सब का सेवन करने से पनी त ठीक हो जाते हैं ।
 के छिलके उतारकर छोटे - छोटे टुकड़ें करके दूध में उबालकर , आधा कप प्रति घंटे के अंतर से पिलाने पर गर्मी के कारण होने वाले दस्तों में लाभ होता है ।
 रात में 2 सेब सोते समय कुछ दिनों तक खाने से उदर कृमि मर जाते हैं । सेब का रस पीने के बाद गर्म पानी का सेवन करने से गैस बनना बंद हो जाता है ।
 मीठे सेबों का नियमित सेवन करते रहने पर सूखी खाँसी ठीक होती है ।
 भूखे पेट या भोजन के बाद छिलके सहित सेब का सेवन करने से कब्ज में । लाभ होता है ।
 सेब का रस और मुरब्बा का सेवन करते रहने पर कफ , खाँसी , यक्ष्मा , मानसिक रोग ठीक हो जाते हैं ।
 सेब का रस पीते रहने से आँतों के घावों में लाभ होता हैं । भोजन के 15 मिनट पहले 1 या 2 सेब बिना छिले खुब चबा - चबाकर खाने से स्मरण शक्ति बढ़ती है ।
 सेब खाकर या मुरब्बा खाकर सोने से अनिद्रा रोग दूर हो जाता है ।
सेब के 1 गिलास रस में स्वादानुसार मिश्री मिलाकर पीते रहने से कुछ दिनों ५ में भूख न लगने वाला रोग ठीक हो जाता है ।
 खट्टे सेब के रस में आटा गुंथकर रोटी बनाकर सेवन करते रहने पर लाभ होता है ।
 सेब का रस बार - बार सेवन करते रहने से या 1 - 1 पका सेब दिन में तीन बार सेवन करते रहने पर कुछ दिनों में मदिरापान छूट जाता हैं ।

बेर के लाभ



★बेर  वृक्ष के पत्तों का चूर्ण मल्ले के साथ पीने से अतिसार रोग ठीक हो जाता है ।★ बेर के पत्तों को पीसकर गर्म करके उसकी पुल्टिश बांधने से फोड़े - फुसी में लाभ होता है । ★ बेर वृक्ष के कोमल पत्ते व जीरा मिलाकर पानी में पीसकर उनकी ठंडाई ( भाँग ) बनाकर कपड़े से छानकर पीने से गर्मी के कारण रुका पेशाब खुलकर आता है ।
★ बेर के बीज को पानी में घिसकर दिन में 2 बार 1 - 2 बार लगाते रहने से नेत्र स्त्राव दूर हो जाता है ।
★ बेर वृक्ष की छाल और पत्तों का काढ़ा बनाकर छाछ में मिलाकर पशुओं को पिलाने से चेचक रोग ठीक हो जाता है ।
★ बेर वृक्ष की छाल का टुकड़ा मुँह में रखकर रस चूसते रहने से दबी आवाज खुल जाती है ।
★ बेर के बीज का गर्भ और पलाश ( ढाक ) के बीज समान मात्रा में मिलाकर आक के दूध में 6 घंटे तक खरल करके रुई के फाहे की बाती को भिगोकर बिच्छू के काटे स्थान पर लेप करने से बिच्छू के विष का प्रभाव दूर हो जाता है ।
★ताजे या सूखे 20 ग्राम चनाबेर 16 गुना पानी में उबालकर , एक चौथाई भाग शेष रहने पर कपड़े से छानकर थोड़ी - सी चीनी मिलाकर सेवन कराने से ज्वर की दाह , तृषा एवं व्याकुलता दूर होती है और पित्तज्वर , विषम ज्वर में लाभ होता है ।
★ बेर के पत्तों का क्वाथ बनाकर दिन में 2 - 3 बार कुल्ले करने से मुख पाक रोग ठीक हो जाता है ।
★ बेर वृक्ष की छाल का क्वाथ बनाकर कुल्ले करने से मसूढ़े मजबूत बनते हैं । और लार टपकना बंद हो जाता है ।★ बेर के पत्तों का रस भैंस के दूध के साथ सेवन करने से चेचक रोग ठीक हो  जाता है ।
★ बेर के पत्तों का कल्क 3 - 3 ग्राम , 1 - 1 ग्राम गुड़ मिलाकर सेवन करने से कुछ दिनों में चेचक रोग में लाभ होता है ।
★ बेर के कोमल पत्तों को कूटकर , पानी में मिलाकर घड़े में डालकर मथनी से बिलोकर आए झागों का शरीर पर लेप करने से सभी प्रकार के दर्द दूर होते हैं ।
★ बेर वृक्ष की छाल का चूर्ण 7 ग्राम गुड़ के साथ दिन में दो बार सुबह - शाम सेवन करने से श्वेत प्रदर , रक्त प्रदर में लाभ होता है ।
★ चनाबेर की छाल का चूर्ण गुड या शहद के साथ खाने से श्वेत प्रदर और रक्त | प्रदर रोग ठीक हो जाता है ।
★ बेर वृक्ष की छाल को बकरी के दूध में पीसकर शहद के साथ मिलाकर सेवन करने से अतिसार और रक्ततिसार रोग में लाभ होता है । बेर के मूल की छाल और तिल अलग - अलग पीसकर या बकरी का दूध बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने पर अतिसार और रक्ततिसार रोग में लाभ होता है ।

पसीना आना समान्य बात




पसीना  आना हमारे शरीर की एवं बिल्कुल सामान्य प्रक्रिया है । इससे शरीर का तापमान नियंत्रित होता है । मसलन बरखार में पसीना आता है । जिससे श्रीर का तापमान नियंत्रण में रहता है । शरीर में मौजूद ऊष्मा के विन्यमन के लिए पसीना निकलता है , लेकिन कभी - कभी पसीना अधिक आना मुश्किलें खड़ी कर देता है । कारण यह है कि पसीने को नियंत्रित करने वाली ग्रंथि अति सक्रिय हो जाती है । उपचार के लिए कई बार इटा सा ऑपरेशन करने की भी जरूरत एर जाती है । अधिक पसीने के लिए कोई उपचार पद्धति नहीं है लेकिन एहतियात के तौर पर दो बार नहाए और टैल्कम का इस्तेमाल करें । पसीना अधिक आने की वजह से बगल में तथा जोड़ों के भीतर फंगल इंफेक्शन भी हो सकता है । रह मुख्यतः बारिश और गर्मी के मौसम में होता है जिसे टीनिया कुरसिस कहते हैं । लड़कों के मुकाबले लड़कियों को अधिक समस्याओं का साना करना पड़ता है , क्योंकि अधिक पसीना आने के कारण बालों में नमी । बनी रह स्कती है जिससे कई तरह | र्क त्वचा संबंधित समस्याएं सिर उठा सकती हैं । इससे बचने के लिए रोजना | सिर धोना जरूरी है । बालों को लगातार एंटी टैंड्रफ शेपू से साफ़ करें , नहीं तो इसमें बैक्टीरियल फंगल इंफेक्शन | होने के आसार हते हैं । हालांकि पसीना आना पूर्णतः प्राकृतिक क्रिया है लेकिन कई बार तनाव के कारण भी अधिक | पसीना आ सकता है । मोटापे में बगल ओर जांघ में घर्षण के कारण भी फंगले इंफेवसान हो सकता है ।

आदत न बन जाए




किसी विशिष्ट पदार्थ जैसे कुछ मीठा, नमकीन या जंक। भोजन खाने की लोगों को इस्तेमाल किया जाता है। वे चाहकर भी इससे पीछा नहीं छुड़ा पाते हैं। इसको अंग्रेजी में क्रेविंग कहते हैं - अर्थात किसी चीज को खाने की तीव्र इच्छा, लालसा। कुछ लोगों में यह क्रेविंग इस क़दर हावी हो जाती है कि वे अपनी आर्थिकता के लिए कुछ भी कर जाते हैं। हालांकि कई मामलों में यह शरीर में किसी चीज़ की कमी का सूचक हो सकता है। कुछ लोगों को कैल्शियम की कमी के कारण संक्रमण या स्लेट पेंसिल खाते हैं। लेकिन लंबे समय के लिए यह स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालता है।


आंखो को रखे बरकरार


 क्या करे...... ?

                                   कसरत  घर पर ऐसी जगह खड़े हो जाएं , जहां से आप दूर तक देख सकें । तर्जनी को सामने की ओर 15 इंच की दूरी पर रखें । पहले उंगली और फिर सबसे दूरस्थ जो वस्तु देख सकते हैं उसे एकटक देखने की कोशिश करें । ऐसा दिन में तीन बार करें ।


                                विटामिन सी यह शरीर के रोग प्रतिरोधक तंत्र को मजबूती प्रदान करता है । यह आंखों का बीमारियों और इंफेक्शन से बचाव करता है । इसका सेवन आवश्यक है ।


                                  त्राटक सूखापन दूर करने के लिए त्राटक करें । अंधेरे में दिया जलाकर आंखों के समानांतर डेढ़ फीट की दूरी पर रखी लौ पर आधा घंटा ध्यान केन्द्रित करें । इससे आंखों में पानी आ जाएगा ।



चिलचिलाती गर्मी में आंखों की देखभाल जरूरी है । जानिए आंखों को सेहतमंद रखने के लिए क्या करें 




क्या न करे.....?



                               शक्कर की अधिकता अधिक शक्कर की मात्रा से आंखें कमजोर हो सकती हैं । शक्कर वाले पेय से परहेज करें । ।


                                सीधा प्रकाश तेज़ प्रकाश जैसे सूर्य या तेज रोशनी वाले बल्ब आदि को सीधे न देखें । इससे आंखों की तंत्रिकाओं और कोशिकाओं दोनों को नुक़सान हो सकता है ।


                             लगातार चश्मा पहना पूरे दिन के दौरान कुछ समय के लिए चश्मा एक ओर रख दें । कॉन्टेक्ट लेंस भी दिनभर न पहनें ।


                                कम्प्यूटर में देखना स्क्रीन से इतनी दूरी रखें कि आंखों पर जोर न पड़े । थोड़ी - थोड़ी देर में आंखों को आराम दें । हर 20 मिनट में 20 मीटर की दूरी पर 20 सेकंड के लिए देखें ।